EP 127: ZULFIKAR ALI BHUTTO PAKISTANI PM जिसने INDIRA GANDHI के साथ किया शिमला समझौता

by: Crime Tak     Published on: 19 January 2019

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#zulfikaralibhutto #benazirbhutto #shamsthairkhan #johnkennedy2ND JULY: इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो के बीच शिमला समझौता4 अप्रैल 1979 को पाकिस्तान के रावलपिंडी में एक फांसी हुई। यह फांसी मिली जुल्फिकार अली भुट्टो को, जो कोई आम शख्स नहीं थे बल्कि उस मुल्क के ताकतवर राजनेताओं में से एक थे। आज पाकिस्तान के सिंध प्रांत में जुल्फिकार अली भुट्टो की याद में 4 अप्रैल को अवकाश घोषित किया गया है। पाकिस्तान के 9वें प्रधानमंत्री के बारे में कुछ बातें ऐसी हैं जिन्हें जानकर आपके रौंगटे खड़े हो जाएंगे.3 अप्रैल 1979 की रात का समय था, तब जब सभी लोग सो गए थे, रावलपिंडी की जेल में सन्नाटे को चीरते हुए कुछ कदम लगातार बढ़ रहे थे. और आखिरकार वह अपनी मंजिल पर पहुंच गए.जेल के वार्डन ने कैदी को उठाया और उसको आखिर सफर के लिए तैयार किया गया.अगला दिन लग चुका था, कैदी को हथकड़ी डालकर फांसी के फंदे के आगे खड़ा किया गया. इससे पहले उसकी चाय पीने की आखिरी इच्छा पूरी भी नहीं हो पाई थी.सुबह ठीक 2 बजकर 4 मिनट हुए थे कि जल्लाद ने लीवर खींच दिया और वह लटक गया. इसी के साथ उसका शरीर अब मुक्त हो चुका था, लगभग आधा घंटा लटकने के बाद आत्मा शरीर से निकल चुकी थी.ये फांसी की कहानी है, पाकिस्तान के 10वें प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो की. यह फांसी उस मुल्क में लोकतंत्र का गला घोंटने जैसी थी.ऐसे में यह जानना दिलचस्प रहेगा कि आखिर कैसे एक प्रधानमंत्री तानाशाही शासन के दौरान फांसी के तख्त तक पहुंचZulfikar Ali Bhutto, (born Jan. 5, 1928, near Lārkāna, Sindh, India [now in Pakistan]died April 4, 1979, Rāwalpindi, Pak.), Pakistani statesman, president (1971–73), and prime minister (1973–77), a popular leader who was overthrown and executed by the military.Born into a noble Rājpūt family that had accepted Islām, Bhutto was the son of a prominent political figure in the Indian colonial government. He was educated in Bombay and at the University of California, Berkeley (B.A., 1950). Bhutto studied law at the University of Oxford and then practiced law and lectured in England. Upon his return to Pakistan (1953), he set up a law practice in Karāchi, where he was appointed a member of Pakistan’s delegation to the United Nations in 1957.After Mohammad Ayub Khan seized the government in 1958, Bhutto was appointed commerce minister and then held other cabinet posts. After his appointment as foreign minister he began working for greater independence from Western powers and for closer ties with China. His opposition to the peace with India after the 1965 war over Kashmir caused him to resign from the government, and in December 1967 he founded the Pakistan People’s Party. Bhutto denounced the Ayub Khan regime as a dictatorship and was subsequently imprisoned ---------About the Channel:आज वक़्त के जिस दौर में हम जी रहे हैं उसमें आने वाला पल किस शक्ल में हमारे सामने आएगा कोई नहीं जानता। हां....अगर हम कुछ कर सकते हैं तो सिर्फ़ इतना कि आने वाले पल के क़दमों की आहट को ज़रूर भांप सकते हैं। मगर आने वाले वक़्त की नीयत क्या है ये तभी जाना जा सकता है जब हम अपने आंख और कान खुले रखें। और इसमें CRIME TAK आपकी मदद करेगा। क्राइम की दुनिया की हर छोटी-बड़ी ख़बरों से आपको आगाह करके। ताकि आप सुरक्षित रहें।Nowadays we are living in such a age, where one knows that what will happen in next moment? In such scenario what we can do is to be stay aware each moment. We can prepare for future only if we keep our eyes and ears open. CRIME TAK is here to help and assist you in this regard, by making you aware of all crime related incidents/stories, so that you can be safe.Follow us on:FB: https://www.facebook.com/crimetakofficial/Twitter: https://twitter.com/CrimeTakBrand